संस्था का कोष जनम्न प्रकार से संजचत होर्गा:



िन्दा

2. शुल्क
3. अनुदान
4. सहार्ता
5. राजकीर् अनुदान
1. उक्त प्रकार से संहचत राहश दकसी राष्ट्रीर्कृत बैंक में सुरहक्षत रिी जार्ेगी।
2. अध्र्क्ष/सहचव/कोर्ाध्र्क्ष में से दकन्त्हीं दो पदाहिकाररर्ों के संर्ुक्त हस्ताक्षरों से बैंक में लेन-देन सम्भव होगा।
चवशेषाचिकार की राचश एक मुश्त स्वीकृत कर सकें गेः
1. अध्र्क्ष - 11 हजार रूपर्े
2. सहचव - 5100 रूपर्े

3. कोर्ाध्र्क्ष - 1000 रूपर्े उपरोक्त राहश का अनुमोदन प्रबन्त्िकाररणी से करार्ा जाना आवश्र्क होगा। अंकेक्षक की हनर्ुहक्त प्रबन्त्िकाररणी द्वारा की जार्ेगी।
संस्था का अंके क्षणः

संस्था के समस्त लेिाजोिों का वार्र्ाक अंकेक्षण करार्ा जार्ेगा। वार्र्ाक लेिे रहजस्रार संस्थाऐं नागौर को प्रस्तुत करना होगा।
संस्था के हविान संस्था के हविान में आवश्र्कतानुसार सािारण सभा के कुल सदस्र्ों के 2/3 बहुमत से पररवतान,पररवद्धान अथवा संशोिन दकर्ा जा
में पररवतानः- सकेगा जो भारत सरकार संस्था अहिहनर्म 1860 के अनुरूप होगा। संस्था का चवघटनः-

र्दद संस्था का हवघटन आवश्र्क हुआ तो संस्था की समस्त चल व अचल सम्पहत समान उद्देश्र् वाली संस्था को
हंस्तातररत कर दी जावेगी। लेदकन उक्त समस्त कार्ावाही भारत सरकार संस्था अहिहनर्म 1860 के
अन्त्त्रगत संस्थाएं को पंजीर्न रद्द करने का पूणा अहिकार होगा।

संस्था के लेिे जोिे रहजस्रार संस्थाएं नागौर को संस्था के ररकाडा का हनरीक्षण/ जांच करने का पूणा अहिकार
होगा व उनके द्वारा ददए गए सुझावों की पूर्ता की का हनरीक्षणः- जावेगी।

प्रमाहणत दकर्ा जाता है दक उक्त हविान (हनर्मावली) अग्रणी सेवा सदन की सही व सच्ची प्रहत है।

रजनी कांत
सहचव